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    Home » सत्ता का सर्किट: क्या है दिग्विजय सिंह का लक्ष्य? उमा भारती साइडलाइंड क्यों नहीं? क्या है नरोत्तम मिश्रा का दर्द?
    Madhya Pradesh

    सत्ता का सर्किट: क्या है दिग्विजय सिंह का लक्ष्य? उमा भारती साइडलाइंड क्यों नहीं? क्या है नरोत्तम मिश्रा का दर्द?

    suntodayBy suntodayDecember 30, 2025Updated:December 30, 2025No Comments58 Views8 Mins Read
    पर अभी तक किसी भी तरफ से यह जवाब नहीं आया है कि फाइबर की प्रतिमा का खर्च क्या टैक्सपेयर्स के पैसे से हुआ या किसी की अपनी जेब से? और ये टैक्सपेयर्स के पैसे से हुआ तो ये अनावश्यक खर्च क्यों जब पहले से ही धातु की प्रतिमा बनाने का काम चल रहा था? खैर जो भी हो इस विवाद के बीच अमित शाह द्वारा फाइबर की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम टाल दिया गया।
    (इसी कॉलम से उद्दृत)
    राज्यसभा की सीट के लिए?
    Digvijaya Singh (Left)
    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने जानबूझकर ऐसे समय में आरएसएस, भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है जब उनका राज्यसभा का वर्तमान 6 वर्ष का कार्यकाल अगले वर्ष जून में खत्म होने वाला है। 78 वर्षीय दिग्विजय सिंह का राज्यसभा के लिए पुनः पार्टी हाई कमांड का समर्थन पाना वर्तमान परिस्थितियों में कठिन जान पड़ता है। कांग्रेस के केंद्र की राजनीति में तथा मध्य प्रदेश की राजनीति में उनकी स्वीकार्यता वैसी ही है जैसी आजकल भाजपा में प्रज्ञा ठाकुर की। दोनों की कोई पूछ परख नहीं हो रही है।
    बिहार विधानसभा चुनाव से भी दिग्विजय सिंह को दूर रखा गया। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक को वहां जिम्मेदारी मिली पर दिग्विजय सिंह को पार्टी ने कोई भी जिम्मेदारी देने से परहेज किया। सिर्फ बिहार ही नहीं, पहले के अन्य विधानसभा चुनावों में भी यही हालत थी। यह एक साधारण कयास हो सकता है कि उन्होंने यह कदम पार्टी हाई कमांड के ऊपर दबाव बनाने के लिए किया फिर से राज्यसभा में जाने के लिए। पर ऐसा लगता नहीं है। इतना बड़ा हमला पार्टी हाई कमांड के ऊपर और सीधे राहुल गांधी के ऊपर बताता है कि बात कुछ और है जिसके बारे में सिर्फ दिग्विजय सिंह और पार्टी हाई कमांड को पता है।
    अटल जी को फाइबर में कैद किसने किया?
    Union Home Minister Amit Shah in Rewa on December 25, 2025 with Chief Minister Dr Mohan Yadav
    यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रीवा दौरे के समय उनसे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की फाइबर की मूर्ति का अनावरण करवाने का प्रोजेक्ट किसके दिमाग की उपज थी? रीवा के मेयर तो चिल्ला-चिल्लाकर बोल रहे हैं कि नगर निगम ने अटल जी की धातु की प्रतिमा बनाने के लिए पहले ही 90 लाख रुपये से ऊपर की धनराशि स्वीकृत कर दी थी फिर उस प्लेटफॉर्म पर जहां धातु की प्रतिमा का अनावरण होना था वहां अटल जी की सस्ती वाली फाइबर की प्रतिमा किसने स्थापित कर दी और वो भी उसी जगह जहां धातु की प्रतिमा स्थापित होनी थी।
    मेयर कांग्रेस पार्टी से आते हैं। उनका निशाना जाहिर है स्थानीय विधायक और उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल हैं। पर अभी तक किसी भी तरफ से यह जवाब नहीं आया है कि फाइबर की प्रतिमा का खर्च क्या टैक्सपेयर्स के पैसे से हुआ या किसी की अपनी जेब से? और ये टैक्सपेयर्स के पैसे से हुआ तो ये अनावश्यक खर्च क्यों जब पहले से ही धातु की प्रतिमा बनाने का काम चल रहा था? खैर जो भी हो इस विवाद के बीच अमित शाह द्वारा फाइबर की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम टाल दिया गया।
    ये क्या राजनीतिक संदेश था चौहान के लिए?
    Union Agriculture and Farmers Welfare minister Shivraj Singh Chouhan
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशंसा किया जाना कि वे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ज्यादा ऊर्जा से कार्य कर रहे हैं, इस समय भाजपा में चर्चा का विषय है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि ये ठीक है कि उन्होंने चौहान और डॉ. यादव दोनों की प्रशंसा की जिससे चौहान कैंप दुखी ना हो पर इस तुलना की क्या जरूरत थी कि डॉ. मोहन यादव चौहान से ज्यादा ऊर्जा से काम करते हुए मध्य प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा रहे हैं।
    क्या यह एक स्वाभाविक बयान था जिसमें बिटवीन द लाइन्स नहीं पढ़ा जाना चाहिए या इस बयान और तुलना के जरिए कोई खास राजनीतिक संदेश चौहान और अन्य नेताओं को दिया गया इस पर अभी भी बहस चल रही है।
    प्रमोशन या डिमोशन?
    Union Cabinet Minister Jyotiraditya Scindia (Right)
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह डॉ. मोहन यादव द्वारा ज्यादा ऊर्जा से काम करने की प्रशंसा करके उनकी ऊर्जा तो बढ़ा गए पर यह क्या उन्होंने ग्वालियर में अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजा कहकर संबोधित किया। मध्य प्रदेश और बाहर भी सिंधिया को उनके समर्थक और अनुयायी महाराज कहकर संबोधित करते हैं। वस्तुतः ब्रिटिश पीरियड में भी सिंधिया घराने के शासकों का पद महाराज का ही रहा है। उनके अंतर्गत कई राजा हुआ करते थे। यही कारण है कि सिंधिया को महाराज और दिग्विजय सिंह को राजा बोलकर संबोधित किया जाता है उनके अनुयायियों द्वारा।
    वैसे तो स्वतंत्र भारत में ना कोई महाराज है और ना कोई राजा पर संबोधन की परंपरा तो चली ही आ रही है। तो केंद्रीय गृह मंत्री क्या भूल गए कि सिंधिया को आज भी महाराज कहकर संबोधित किया जाता है या उन्होंने जानबूझकर उन्हें राजा की उपाधि से संबोधित किया इस बात को तो स्वयं अमित शाह ही बता सकते हैं। पर चर्चा में राजा-महाराजा की बातें चल रही हैं।वैसे देखा जाए तो अमित शाह द्वारा किसी को राजा कहा जाना एक बड़ा सम्मान माना जा सकता है पर जब पहले से ही कोई “महाराजा” हो तो उसे “राजा” कहा जाना सम्मान कैसे माना जाए?
    बिना प्लेट के खाना कैसे?
    Urban Administration and Development Minister, Madhya Pradesh Kailash Vijayvargiya
    एक लंबे समय से इस उड़ान की प्रतीक्षा थी। रीवा और इंदौर के बीच सीधी फ्लाइट की शुरुआत हो गई। इस फ्लाइट के लिए रीवा के स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल काफी समय से सक्रिय थे। फ्लाइट शुरू हुई। सबने सेलिब्रेट किया। पर सुनने में आया है कि खाने का एक प्लेट न होने की वजह से नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को दिक्कत हो गई। हुआ ये कि मंत्री महोदय रीवा से इंदौर के लिए उस फ्लाइट में सवार हुए।
    रीवा में स्थानीय अधिकारियों ने रास्ते में भोजन-पानी का पूरा प्रबंध किया। मंत्री महोदय के स्टाफ को भोजन हैंडओवर कर दिया। प्लेट भी दे रहे थे पर स्टाफ ने लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि प्लेट की जरूरत नहीं है। पर जब मंत्री महोदय को फ्लाइट में भोजन की आवश्यकता हुई तो प्लेट तो था ही नहीं। अभी हाल में बीमार पड़ने तथा अस्पताल में भर्ती होने के बाद जाहिर है मंत्री महोदय डॉक्टरों के निर्देशानुसार समय पर भोजन लेते हैं। पर यहां स्टाफ से चूक क्या हुई उन्हें फिर इंदौर पहुँचने पर ही नियमित भोजन मिला। 
    मैं साइडलाइंड नहीं
    Former Union Minister and Senior BJP leader Uma Bharti meeting state BJP president Hemant Khandelwal
    राजनीतिक गलियारों में साइडलाइन (Sideline) किए जाने की कोई भी परिभाषा हो भाजपा की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती इस बात से इंकार करती हैं कि कोई वास्तविक राजनेता जिसमें क्षमता है वो साइडलाइंड भी हो सकता है। दिसंबर 25 को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को उनके जयंती पर याद करते हुए उमा भारती ने कहा कि एक समय था जब अटल जी को पार्टी ने 1984 से लेकर 1995 तक इग्नोर किया और गाहे-बगाहे ही पूछा चुनाव के समय सभाओं को संबोधित करने के लिए। उसी तरह वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी केशुभाई पटेल के प्रभाव में पार्टी ने लगभग 5 वर्षों तक गुजरात से दूर रखा पर अंततः दोनों राजनेताओं ने अपनी क्षमता के कारण राजनीतिक ऊंचाइयों को प्राप्त किया।
    उमा भारती का राजनीतिक संदेश साफ था कि कोई उन्हें राजनीतिक रूप से चुका हुआ न समझे और वे साइडलाइंड नहीं हैं। वो साइडलाइन्ड हैं या नहीं चर्चा इस बात की नहीं है।यह तो सबको पता है। चर्चा इस बात की है उन्हें यह बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी?
    वजूद बचाने की कोशिश
    Ex-Home Minister, Madhya Pradesh Narottam Mishra
    एक और नेता हैं जो कहना चाहते हैं कि “मैं साइडलाइंड (Sidelined) नहीं हूँ”। प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का फ्रस्ट्रेशन (Frustration) लाजमी है। वर्ष 2020 में जब वे कांग्रेस सरकार में डिफेक्शन (Defection) करवा के भाजपा की सरकार बनवा रहे थे और वेस्ट बंगाल तथा उत्तर प्रदेश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विश्वसनीय सहयोगी के रूप में जिम्मेदारी का निर्वाहन कर रहे थे तो क्या उन्होंने ये सोचा होगा कि इतने बुरे दिन भी आ सकते हैं? 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया विधान सभा क्षेत्र में कांग्रेस के राजेंद्र भर्ती के हाथों मिली हार ने उनके सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं ।
    उत्तराखंड में हार के बाद भी पुष्कर सिंह धामी को वहां का मुख्यमंत्री बना दिया गया पर नरोत्तम मिश्रा को सीएम तो क्या मंत्री तक नहीं बनाया गया। ना तो उन्हें लोकसभा का टिकट मिला और ना ही उन्हें राज्यसभा भेजा गया। पिछले वर्ष ही भाजपा ने 5 नेताओं को राज्यसभा निर्वाचित करवा के भेजा पर उनमें नरोत्तम मिश्रा का नाम नहीं था। एक आशा बची थी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी की वह हेमंत खंडेलवाल ले गए। नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर में अमित शाह से मिले उसके बाद अपने अनुयायियों को उन्होंने ट्रेन के डिब्बे से एक शेर सुनाया। दादा (उन्हें दतिया में दादा के नाम से ही जाना जाता है) का कहना है कि उन्हें चुका हुआ ना समझा जाए, वे मजबूती के साथ बदस्तूर अपनी जगह मौजूद हैं। देखते हैं दादा को धैर्य का फल कब मिलता है?
    -रंजन श्रीवास्तव
    Bhopal Chief Minister Delhi Digvijaya Singh Dr Mohan Yadav Jabalpur Jyotiradiya Scindia Narottam Mishra Rewa Shivraj Singh Chouhan Uma Bharti Union Home Minister Amit Shah
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