
हाउस अरेस्ट?
इसमें कोई शक नहीं कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समर्थक मायूस हैं। सिर्फ इसलिए नहीं कि उनको 2 वर्ष पहले मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, बल्कि इसलिए भी कि मामा ने या तो खुद को विदिशा लोकसभा क्षेत्र में ही राजनीतिक कारणों से सीमित कर लिया है या उन्हें सीमित कर दिया गया है। लोकसभा में वे विदिशा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान या तो वे स्मार्ट पार्क में अपनी दिनचर्या के हिसाब से पौधे लगाते देखे जाते हैं, या अपने निवास में या फिर विदिशा क्षेत्र में। प्रदेश सरकार के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति नगण्य ही है। उनके एक समर्थक नेता का कहना है कि मामा को सबसे ज्यादा प्रिय है पूरे प्रदेश में जनता के बीच रहना और भाषण के माध्यम से उनसे रूबरू होना, पर लगता है मामा विदिशा में हाउस अरेस्ट जैसे हो गए हैं। इसी बीच चौहान के भोपाल स्थित बंगले की सुरक्षा बढ़ने ने उनके समर्थकों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है और यह चर्चा हो रही है कि इसके पीछे कारण क्या है- उनकी पॉपुलैरिटी या उनको कोई खतरा?

ये कैसा इंटरव्यू?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने वर्तमान कार्यकाल का 2 वर्ष पूरा करने पर भोपाल में पत्रकारों से रूबरू हुए। उसके बाद बहुत से पत्रकारों ने उनका इंटरव्यू करना चाहा। निराश किसी को नहीं किया गया, पर सबको एक साथ सीएम हाउस में बुला लिया गया। भारी भीड़ के वजह से किसी पत्रकार का सवाल सिर्फ एक प्रश्न का हुआ और किसी का 2-3 प्रश्न का। वो लोग सौभाग्यशाली रहे जिनको 4-5 मिनट का इंटरव्यू करने का मौका मिला। कुछ पत्रकारों को प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल की मदद लेनी पड़ी कि वे कुछ ज्यादा समय तक इंटरव्यू कर पाएं। पहले ऐसा नहीं हुआ करता था। पत्रकारों को उनके बैनर के मुताबिक इंटरव्यू के लिए समय निर्धारित किया जाता था और पत्रकारों से इंटरव्यू का सिलसिला कई दिन चलता था। इसका फायदा यह भी होता था कि सीएम से कुछ न कुछ नई बात कई दिनों तक देखने को मिल जाती थी।

अध्यक्ष ने संगठन की ताकत बताई
यह भूले–बिसरे गीत की तरह हो गया था कि प्रदेश भाजपा सरकार के मंत्री भाजपा प्रदेश कार्यालय में आकर बैठा करते थे और उनसे कार्यकर्ता अपनी मन की बात, अपने काम बताया करते थे। यह परिपाटी भाजपा के तत्कालीन महामंत्री (संगठन) कप्तान सिंह सोलंकी के कहने पर शुरू हुई थी। तब पूरा रोस्टर हुआ करता था कि कोई न कोई मंत्री नियत दिन पर और नियत समय पर कार्यालय में आकर बैठेगा और वह कार्यकर्ताओं को सुनेगा। धीरे–धीरे मंत्री लोगों ने किसी न किसी बहाने इस परिपाटी से किनारा कर लिया। अब कार्यकर्ता के पास सिर्फ दो ही स्थान बचे थे मंत्रियों से मिलने के लिए— या तो वल्लभ भवन या उनके बंगले में, जहां पहले से ही विभिन्न तरह के कैरेक्टर्स की भीड़ रहा करती थी और है। वर्तमान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, जो ऑर्गेनाइजेशन मैन के नाम से जाने जाते हैं, ने इस परिपाटी को फिर से शुरू किया है। कार्यकर्ता अपनी परेशानियों या सरकार की योजनाओं के बारे में फीडबैक बताने मंत्रियों से मिलने लगे हैं।

राहुल कोठारी का नाबिन कनेक्शन
प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त महामंत्री राहुल कोठारी को इन दिनों और भी बधाई मिल रही है। महामंत्री बने तो कई महीने हो गए, ये उसकी बधाई नहीं है, बल्कि नितिन नाबिन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई। लोग सोच सकते हैं कि बधाई तो नितिन नाबिन को मिलनी चाहिए, राहुल कोठारी को बधाई क्यों? वस्तुतः जब अनुराग ठाकुर भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे, तो उनकी टीम में 2 महामंत्री थे— एक तो राहुल कोठारी और दूसरा नाम बताने की जरूरत नहीं है। जी हां— नितिन नाबिन। अनुराग ठाकुर के उस समय की पदाधिकारियों की टीम में मध्य प्रदेश से सिर्फ राहुल कोठारी थे।

रजनीश अग्रवाल का नबीन कनेक्शन
प्रदेश भाजपा मंत्री रजनीश अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के बारे के अपना संस्मरण लिखा है। संस्मरण हूबहू इस तरह है:

