“थोड़ा मेरे स्वभाव में टेढ़ापन है. मैं कहता हूँ कि यह ज़रूरी थोड़े ही है कि मैं जहाँ बैठूँ, सीएस भी वहीं बैठे. सीएस वल्लभ भवन बैठे और मैं जहाँ बैठना है वहाँ बैठूँगा. चिंता मत करो, आगे देखो.”
-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिस तल्खी के साथ डॉ. यादव ने मुख्य सचिव से जुड़े प्रश्न का उत्तर दिया, उससे यही आभास हुआ कि दोनों के बीच या तो तालमेल ठीक नहीं चल रहा है या फिर कोई ऐसा मुद्दा है जो सतह पर दिखाई नहीं दे रहा.

अवसर था—मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस का. स्थान था कुशाभाऊ ठाकरे सभागार.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मण्डलोई तथा जनसंपर्क विभाग के आयुक्त दीपक सक्सेना उपस्थित थे.
जब यह पूछा गया कि मुख्यमंत्री के दो वर्ष पूर्ण होने जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्य सचिव उनके साथ क्यों नहीं हैं, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा—
“थोड़ा मेरे स्वभाव में टेढ़ापन है. मैं कहता हूँ कि यह ज़रूरी थोड़े ही है कि मैं जहाँ बैठूँ, सीएस भी वहीं बैठे. सीएस वल्लभ भवन बैठे और मैं जहाँ बैठना है वहाँ बैठा हूँ . चिंता मत करो, आगे देखो.”
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री कुछ असहज अवश्य दिखे, पर उन्होंने स्वयं को संयत रखते हुए मुस्कुराया, दोनों हाथों से ताली बजाई और बोले—“अपनी तो यही स्टाइल है”.

यह छिपा तथ्य नहीं है कि मुख्य सचिव अनुराग जैन केंद्र सरकार की पसंद से मध्यप्रदेश भेजे गए थे और उनके कार्यकाल में हुई वृद्धि भी केंद्र की ही इच्छा का परिणाम थी.
तत्कालीन मुख्य सचिव वीरा राणा के रिटायरमेंट के बाद नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा थी कि अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजोरा मुख्यमंत्री की पसंद हैं और मुख्य सचिव बनने के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. कहा जा रहा था कि डॉ. राजोरा के साथ मिलकर मुख्यमंत्री अपनी एक मज़बूत टीम बनाना चाहते थे. डॉ राजोरा मुख्यमंत्री से उनके निवास पर मिले इसके बाद सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल हो गया कि डॉ राजोरा मुख्य सचिव बनाने वाले हैं. कहा जाता है कि कुछ लोगों ने उन्हें बधाई तक दे दिया पर अंततः अनुराग जैन को दिल्ली से वापस बुलाकर अक्टूबर 2024 में मुख्य सचिव नियुक्त किया गया.
कहा जाता है कि केंद्र सरकार डॉ. राजोरा के नाम पर सहमत नहीं थी और उसकी पसंद अनुराग जैन थे, जो पहले पीएमओ में रह चुके हैं. प्रशासनिक हलकों में इसे केंद्र द्वारा मध्यप्रदेश की नौकरशाही पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा गया.
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री सचिवालय से कुछ अधिकारियों को हटाया जाना—जो सीएम के करीबी माने जाते थे—मुख्य सचिव की अनुशंसा पर हुआ.
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच मतभेद तब खुलकर सामने आए जब इस वर्ष मार्च में डॉ. यादव ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की (झाबुआ सहित), लेकिन अनुराग जैन ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक में इस पर असहमति जताई. उन्होंने सुझाव दिया कि नए कॉलेजों के बजाय मौजूदा 17 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाकर डॉक्टरों की कमी दूर की जाए. जैन ने मातृ तथा मानसिक स्वास्थ्य और अमानक दवाओं के मुद्दे पर फोकस बढ़ाने पर भी बल दिया.
जैन के सेवानिवृत्ति–काल (31 अगस्त 2025) के नजदीक आने पर डॉ. यादव ने दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से कई दौर की बातचीत की. भोपाल में उहापोह की स्थिति थी पर कुछ अधिकारीयों के अनुसार अनुराग जैन के रिटायरमेंट के दिन यानी 31 अगस्त के दो दिन पहले ही केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग में उनके एक्सटेंशन को लेकर अनुमति का आदेश तैयार था. जैन को एक वर्ष का कार्यकाल–विस्तार मिला.
इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हुई कि मुख्यमंत्री अपनी पसंद के अधिकारी को मुख्य सचिव बनाकर एक समन्वित टीम तैयार करना चाहते थे, जो वे 2024 में नहीं कर पाए. लेकिन केंद्र ने अनुराग जैन को एक वर्ष का एक्सटेंशन दे दिया.

