“जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा.
सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती
भोपाल: इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई मौतों पर दुख और संवेदना जाहिर करते हुए मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा है कि साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं।
सोशल मीडिया माइक्रोब्लॉगिंग साइट X पर लिखते हुए उमा भारती ने कहा है कि, “प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।”
ज्ञातव्य है कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से पिछले 2 सप्ताह में 14 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और बहुत से लोग इस कारण बीमार हो गए जिनका इलाज अस्पताल में करवाया जा रहा है. मध्य प्रदेश शासन ने इस मामले में 2 अधिकारियों को 31 दिसंबर को निलंबित किया और एक अन्य अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया.
“जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा”, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा।
1. साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं।
2. प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और…— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
उन्होंने कहा कि, “सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि, “यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।”
1. इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं।
2. जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?
3. ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
ऐसे बयान जिसमें कहा गया कि “हमारी चली नहीं”, पर प्रतिक्रिया देते हुए उमा भारती ने कहा कि इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं।
“जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?”
1. सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं।
2. मेरी 'X' पर प्रतिक्रिया के बाद मीडिया के पत्रकार भाई बहनों से नहीं मिल पाने के लिए क्षमा मांगती हूं, अभी 3 दिन पहले मेरी दाईं आंख की सर्जरी…
— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
उन्होंने कहा कि, “ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!”

ज्ञातव्य है कि एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मेयर पुष्यमित्र भार्गव और कुछ अन्य लोग बैठे दिखाई दे रहे हैं। उनके सामने टेबल पर चाय, बिस्कुट और बोतल में बिसलरी का पानी दिखाई पड़ रहा है।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार भागीरथपुरा में हुयी मौतों के दौरान रेजीडेंसी कोठी में एक बंद कमरे में हुयी बैठक में इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने यह कहा कि अधिकारी (नगर निगम के अधिकारी) उनकी सुनते नहीं हैं और ऐसे सिस्टम में वह काम नहीं कर सकते।
इस बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, स्थानीय सांसद शंकर लालवानी, कुछ अन्य जान प्रतिनिधि, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और कुछ अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मेयर ने मीटिंग में यह भी कहा कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों को सारे काम दिए गए हैं जबकि अन्य अधिकारी बिना काम के बैठे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उनका यह सन्देश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया जाय कि उनके फैसलों का पालन नहीं हो रहा है और अधिकारी फ़ोन करने पर भी जनता से जज काम नहीं करते।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इंदौर के जिला प्रभारी मिनिस्टर हैं।

