“क्या 2023 में भाजपा हाई कमांड द्वारा शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री नहीं बनाने का फैसला उचित था ?” इस सवाल पर एलन मस्क के एक्स द्वारा बनाये गए एआई (AI) टूल ग्रोक ने बताया है कि फैसला उचित क्यों था और अनुचित क्यों था। इसका अर्थ यह है कि एआई टूल का जजमेंट इस विषय पर ना तो भाजपा नेतृत्व के फैसले के एकदम पक्ष में है और ना एकदम विपक्ष में।ग्रोक द्वारा दिया गया जवाब अक्षरशः निम्नलिखित है:
2023 में बीजेपी हाई कमांड द्वारा शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाने का फैसला कई पहलुओं से देखा जा सकता है। यह निर्णय उचित था या नहीं, इसका जवाब राजनीतिक रणनीति, पार्टी की दीर्घकालिक योजना और राज्य की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यहाँ दोनों पक्षों का विश्लेषण है:
उचित होने के पक्ष में तर्क:
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लंबे शासन से थकान और बदलाव की मांग:
शिवराज सिंह चौहान 2005 से 2018 तक और फिर 2020 से 2023 तक मुख्यमंत्री रहे, जो उन्हें बीजेपी के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक बनाता है। 18 साल के शासन के बाद जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा और चेहरे की मांग स्वाभाविक थी। हाई कमांड ने इसे भांपते हुए पीढ़ीगत बदलाव पर जोर दिया।

BJP legislature party meeting held on December 11, 2023 to elect its new leader minutes before the name of Mohan Yadav (sitting in the third row) sprang surprise on everyone -
गुटबाजी और संगठनात्मक एकता:
शिवराज के लंबे कार्यकाल में बीजेपी के भीतर गुटबाजी बढ़ी थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नए नेताओं के आने और कैलाश विजयवर्गीय जैसे पुराने दिग्गजों के बीच तनाव ने पार्टी को कमजोर करने का खतरा पैदा किया था। मोहन यादव जैसे नए चेहरे को लाकर हाई कमांड ने गुटबाजी को कम करने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश की।
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2024 लोकसभा चुनाव की रणनीति:
2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 163 सीटें जीतीं, जो शिवराज की लोकप्रियता को दर्शाता है। लेकिन हाई कमांड ने इसे पीएम मोदी की छवि और केंद्रीय योजनाओं से जोड़ा। शिवराज को हटाकर और एक ओबीसी नेता मोहन यादव को आगे करके, बीजेपी ने मध्य प्रदेश में जातिगत समीकरणों को साधने और लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीटें जीतने की रणनीति बनाई।
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केंद्र में बड़ी भूमिका की तैयारी:
शिवराज को हटाने का फैसला उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देने का संकेत भी हो सकता था। 2024 में उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया, जो उनकी विशेषज्ञता (कृषि क्षेत्र में मध्य प्रदेश का विकास) और अनुभव को देखते हुए तर्कसंगत लगता है।
अनुचित होने के पक्ष में तर्क:
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लोकप्रियता और जन समर्थन का अपमान:
शिवराज की योजनाएँ, जैसे लाड़ली बहना, ने महिलाओं और गरीब वर्ग में उनकी लोकप्रियता को चरम पर पहुँचाया था। 2023 की जीत में उनकी भूमिका अहम थी। उन्हें हटाना उन मतदाताओं के लिए निराशाजनक हो सकता था, जो उन्हें “मामा” के रूप में देखते थे।

Chief minister Mohan Yadav being congratulated by public representatives and others in December 2023 -
अनुभव का नुकसान:
शिवराज का लंबा प्रशासनिक अनुभव और राज्य की जमीनी समझ बीजेपी के लिए मूल्यवान थी। एक अपेक्षाकृत नए चेहरे, मोहन यादव, को लाना जोखिम भरा था, खासकर तब जब राज्य को स्थिर नेतृत्व की जरूरत थी।
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कार्यकर्ताओं का मनोबल:
शिवराज के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में यह फैसला असंतोष पैदा कर सकता था। उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो पार्टी को एकजुट रखते थे। उनके हटने से कार्यकर्ताओं में भ्रम या नाराजगी की संभावना थी, जो भविष्य में संगठन को नुकसान पहुँचा सकती थी।
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कमल नाथ के खिलाफ मजबूत चेहरा:
कांग्रेस के कमल नाथ एक मजबूत विपक्षी नेता थे। शिवराज का उनके खिलाफ रिकॉर्ड बेहतर था, और उन्हें हटाने से बीजेपी ने एक सिद्ध योद्धा को खो दिया, जिसका असर लंबे समय में दिख सकता था।
निष्कर्ष:
बीजेपी हाई कमांड का यह फैसला उचित था, अगर इसे दीर्घकालिक रणनीति और पार्टी के नवीकरण के नजरिए से देखें। शिवराज को केंद्र में लाकर और राज्य में नया नेतृत्व स्थापित करके, बीजेपी ने भविष्य की राजनीति के लिए आधार तैयार किया। हालांकि, यह अल्पकालिक जोखिम के साथ आया, क्योंकि शिवराज की लोकप्रियता और अनुभव को नजरअंदाज करना भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर विवादास्पद था। अंततः, फैसले की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मोहन यादव कितने प्रभावी ढंग से राज्य को संभालते हैं और शिवराज केंद्र में कितना योगदान देते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में मध्य प्रदेश से बीजेपी को मिली 29 में से 29 सीटें इस फैसले को अभी के लिए सही ठहराती हैं।
(नोट: ग्रोक 3 एक latest artificial intelligence (AI) चैटबॉट है जिसको एलन मस्क की कंपनी xAI ने विकसित किया है। इस पर पूछे गए सवालों के जवाब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। )
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