Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • विधान सभा में “घंटे” की गूंज
    • बुंदेलखंड सर्वदलीय मोर्चा का दिल्ली में धरना 13 फरवरी को
    • आजकल बच्चों का बचपन मोबाइल और टीवी छीन रहा है: मनीषा आनंद
    • कट्टरवादी ताकतें अपने को पीड़ित दिखाकर अपनी पहचान बचाने के नाम पर अनेक षड्यंत्र कर रही हैं: शिवप्रकाश
    • From Sky To Silicon: Positive Story of First 25 Years Of Our Millennium
    • एनजीटी ने इंदौर त्रासदी को लेकर सरकार को फटकारा, कहा यह गंभीर गवर्नेंस विफलताओं को उजागर करता है
    • NGT Slams MP Govt Over Indore Tragedy, Says It Exposes Serious Governance Failures
    • Collector Apologises After Abuse Against Hostel Supt Goes Viral
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
    Sun TodaySun Today
    • Home
    • Top Story
    • Politics
    • Governance
    • Corporate
    • Interview
    • Opinion
    • Blog
    • More
      • National
      • International
      • Hindi
      • Best Practices
      • Lifestyle
      • Video
    Sun TodaySun Today
    Home » सिलावट के लेख में संघ की प्रशंसा- क्या है मायने?
    Madhya Pradesh

    सिलावट के लेख में संघ की प्रशंसा- क्या है मायने?

    suntodayBy suntodayDecember 22, 2025Updated:December 22, 2025No Comments70 Views11 Mins Read
    सिलावट का आरएसएस प्रेम
    Screenshot
    राजनीतिक गलियारों में इस बात पर चर्चा है कि जल संसाधन विभाग के मंत्री तुलसीराम सिलावट का अचानक आरएसएस प्रेम क्यों उमड़ आया? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर एक बड़े हिंदी दैनिक में एक फुल पेज इम्पैक्ट फीचर छपा, जिसमें सिलावट का भी लेख है। लेख का शीर्षक था— संघ शताब्दी वर्ष: एक जीवंत और गतिशील विचारधारा की तपोयात्रा। चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि मुख्यमंत्री मोहन यादव कैबिनेट विस्तार का संकेत दे चुके हैं और हाल ही में उन्होंने यह भी कहा कि सभी मंत्रियों का परफॉर्मेंस देखा जाएगा। सिलावट सिंधिया खेमे से आते हैं और उन मंत्रियों में से एक हैं जिन्होंने मार्च 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ की कैबिनेट से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था और उन्हें भाजपा सरकार में फिर से मंत्री बनाया गया था। तब से लगातार सिलावट को मंत्री पद का पुरस्कार मिलता रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस समय लेख का छपना क्या संयोग है या किसी ऐसी परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाने की कोशिश है, जिसके बारे में बाहर किसी को जानकारी नहीं है।
    विज्ञापन किसने दिया?
    जहाँ तक इम्पैक्ट फीचर का मामला है, अखबारों की भाषा में यह विज्ञापन होता है। जिस पेज पर सिलावट का लेख छपा है, उसी पेज पर एक एजुकेशन ग्रुप के संस्थापक का लेख और उसी परिवार के व्यक्ति, जो एक यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, उनका भी आरएसएस पर लेख है। संस्थापक महोदय को व्यापमं घोटाले में कथित रूप से शामिल होने के लिए सीबीआई द्वारा 2018 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि चांसलर को एक दूसरे घोटाले के सिलसिले में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 2017 में गिरफ्तार किया गया था। इसी पेज पर एक समाजसेवी का भी लेख है। संघ कभी भी किसी विज्ञापन के माध्यम से अपना प्रचार नहीं करता है, इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि इस फीचर पेज को छपवाने के पीछे कौन है, उसका उद्देश्य क्या है और इसके लिए लाखों रुपये का पेमेंट किसने अपनी जेब से किया। ये सारे सवाल अभी अनुत्तरित हैं।
    सीएम का ड्रेस सेंस
    जबसे नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ड्रेस पर टिप्पणी की, तबसे मुख्यमंत्री का ड्रेस सेंस लाइमलाइट में है। विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान, जो 17 दिसंबर को आयोजित हुआ था, विजयवर्गीय ने डॉ. मोहन यादव की पोशाक पर हल्की-फुल्की टिप्पणी की थी, जिस पर सदन में उपस्थित सभी लोग हँस पड़े थे। सत्र के दौरान मुस्कुराते हुए विजयवर्गीय ने कहा, “देखिए अध्यक्ष जी, हमारे मुख्यमंत्री साहब तो आज पूरे सूट-बूट में आए हैं, जबकि हम मंत्री और विधायक गरीबों जैसी वेश-भूषा में यहाँ बैठे हैं।” यह टिप्पणी हँसी-मजाक में की गई थी, लेकिन विपक्ष के एक नेता के अनुसार इस टिप्पणी के बाद विपक्ष के एक अन्य नेता मुख्यमंत्री के ड्रेस पर ही रिसर्च में लग गए हैं। पिछले दिनों इंदौर में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कोट पहने हुए थे। कई बार वे धोती, कुर्ता और जैकेट में भी दिखाई देते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि जैसे पीएम अपने ड्रेस को लेकर कई बार विपक्ष के निशाने पर आए, वही तैयारी मध्य प्रदेश के संदर्भ में विपक्ष के नेताजी कर रहे हों, जिससे पार्टी हाईकमान की नजर में उनका कद बढ़ जाए।
    सीएम ने मीडिया को चौंकाया
    कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री ने मीडिया के लोगों को चौंका दिया—वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुरेश मेहरोत्रा के घर पहुँचकर और वह भी बिना बुलाए। इस तरह की मुलाकात से मीडिया बिरादरी में एक अच्छा संदेश गया। डॉ. मेहरोत्रा ने अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से पत्रकारिता को एक ऊँचाई दी है और वे हजारों ऐसे पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो अपने बल पर पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अलग मुकाम बनाना चाहते हैं। प्रोफेशनल जर्नलिस्ट होने के अलावा डॉ. मेहरोत्रा का एक और मानवीय एवं संवेदनशील पहलू है—वह है पत्रकारों को उनके इलाज के लिए आर्थिक मदद करना। वे देश में एकमात्र ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी कमाई में से 50 लाख रुपये से ऊपर पत्रकारों की हेल्थ सोसाइटी को अब तक दान दिया है, वह भी तब जबकि वे स्वयं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते रहे हैं। कभी एक दौर हुआ करता था जब मंत्री और मुख्यमंत्री, निरंतर तो नहीं पर कभी-कभार, सहज भाव से वरिष्ठ पत्रकारों के घर पहुँच जाते थे और चाय के बीच बहुत से विषयों पर बात भी कर लेते थे। मध्य प्रदेश में राजनेताओं और पत्रकारों के बीच रिश्ते मुख्यतः सहज ही रहे हैं, इस बात के बावजूद कि मीडिया की खबरों के कारण कई बार राजनेता असहज महसूस करते रहते हैं। लेकिन पुरानी परंपरा—राजनेताओं का वरिष्ठ पत्रकारों के यहाँ अपनी स्वयं की पहल पर जाना—कई दशकों से खत्म ही हो गया था। डॉ. मोहन यादव ने उस परंपरा को फिर से शुरू किया है। डॉ मोहन यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “आज भोपाल में वरिष्ठ पत्रकार एवं Whispers In The Corridors के प्रधान संपादक डॉ. सुरेश मेहरोत्रा जी से भेंट की। इस दौरान उनके परिवारजनों से भी आत्मीय चर्चा हुई।”
    जी राम जी
    विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी—जीआरएएमजी) बिल, 2025 (जिसे जी राम जी बोला जा रहा है) संसद में पास होने के बाद यह स्वाभाविक था कि मध्य प्रदेश में अब निगाहें सरकार पर और खासकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल पर रहेंगी कि इस योजना को प्रदेश में कैसे लागू किया जाएगा। क्योंकि नए एक्ट में, जो मनरेगा का स्थान लेगा, 40% वित्तीय बोझ अब राज्य सरकारों पर भी होगा। इसलिए जब अपने विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों को लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मीडिया से बात करने आए, तो पहला सवाल उनसे नए कानून पर ही पूछा गया। पटेल ने कहा कि जो भी प्रावधान इस एक्ट में होंगे, मध्य प्रदेश उन सभी प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करेगा। जाहिर है आने वाले दिनों में पटेल पर न सिर्फ मीडिया बल्कि विपक्ष की भी निगाह रहेगी कि इस एक्ट को कैसे लागू किया जाता है।
    मंत्री की बाइट या लंच बाइट?

    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक अजीब नजारा देखने को मिला। हो सकता है विजयवर्गीय इससे असहज हुए हों, लेकिन अधिकारी तो जरूर इससे खुद को असहज महसूस कर रहे थे। हुआ यह कि डॉ. मोहन यादव सरकार के 2 साल पूरे होने पर सभी मंत्री विभिन्न दिनों में मीडिया से मुखातिब थे, अपने विभागों की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने के लिए। जहाँ पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने इतने सवाल किए कि पत्रकार वार्ता लगभग 2 घंटे चली और अंततः मंत्री महोदय को कहना पड़ा कि बहुत से प्रश्न लंच के दौरान भी हो जाएँगे। श्यामला हिल्स स्थित एक बड़े होटल में आयोजित कैलाश विजयवर्गीय की प्रेस कॉन्फ्रेंस का अभी समापन भी नहीं हुआ था कि अचानक लोग पिछली पंक्तियों से उठकर लंच की तरफ चल दिए। यह असहज स्थिति थी अधिकारियों के लिए, उनके मंत्री के सामने। चर्चा यह है कि या तो कुछ अधिकारियों ने गैर-पत्रकारों को भी पत्रकार वार्ता के लिए बुला लिया या वे गैर-पत्रकारों को पत्रकार वार्ता में शामिल होने से रोक नहीं पाए।

    ये किसकी प्रेस कॉन्फ्रेंस?
    प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी पत्रकारों से मुखातिब थे। लेकिन उनके यहाँ एक दूसरा सीन हुआ। अपने विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों को उन्होंने बताया, पर जब सवाल-जवाब की बारी आई तो पत्रकारों के बहुत से सवालों का जवाब पहल करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त मनीष रस्तोगी ने दिया। मुख्यतः यही हुआ कि पत्रकार सवाल पूछते और वित्त मंत्री से जवाब की आशा करते, पर जवाब आता अतिरिक्त मुख्य सचिव से। यह भी नहीं कहा जा सकता कि जगदीश देवड़ा का अपने विषय पर कमांड नहीं है। वे काफी समय से वित्त मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं।
    वर्किंग प्रेसिडेंट के साथ रिश्ते 
    जब बिहार से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य सरकार में सड़क निर्माण और शहरी विकास एवं आवास मंत्री नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने हैं, प्रदेश भाजपा के वे नेता बहुत खुश हैं जो पूर्व में उनसे मुलाकात कर चुके हैं या उनके साथ कभी न कभी काम कर चुके हैं पार्टी में विभिन्न दायित्वों के निर्वहन के समय। झारखंड में 23 मई 1980 को जन्मे नितिन नवीन बिहार विधानसभा में लगातार पाँचवीं बार के विधायक हैं। बिहार के बाहर वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। 2019 में सिक्किम में राज्य भाजपा के संगठन प्रभारी बने। 2021 से 2024 तक छत्तीसगढ़ भाजपा के सह-प्रभारी थे। जुलाई 2024 में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए छत्तीसगढ़ भाजपा का प्रभारी बनाया गया। तब से लगातार वे इस पद पर थे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने तक। मध्य प्रदेश के दौरों के समय यहाँ के नेता उनसे मिल चुके हैं। कुछ नेता ऐसे हैं जो नितिन नवीन से मिल चुके हैं, पर उनके पास उनकी नितिन नवीन के साथ फोटो या ढंग की फोटो नहीं है। राजनीति में बड़े नेताओं से संबंधों से फर्क तो पड़ता है, पर इन संबंधों को दर्शाने के लिए फोटो या वीडियो की जरूरत पड़ती है। कार्यकर्ता कैसे इन संबंधों की बातों पर विश्वास करेगा जब तक वह फोटो या वीडियो में दोनों नेताओं को साथ न देख ले। इसलिए कुछ नेता तो पहले ही दिल्ली की दौड़ लगा चुके हैं जबकि कुछ और कतार में हैं कि नए वर्किंग प्रेसिडेंट से मिलकर उन्हें बधाई दे दें और उनके साथ अपना फोटो खिंचवा सकें।
    दीपक जोशी पर स्पॉटलाइट
    पूर्व मंत्री और भाजपा नेता दीपक जोशी ने रविवार को देवास में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सोमवार को भोपाल में वे मीडिया से मुखातिब होकर उनसे संबंधित विवाद पर अपना पक्ष रखेंगे। दरअसल विवाद शुरू हुआ सोशल मीडिया में पोस्ट किए गए एक फोटो के बाद, जिसमें दीपक जोशी एक महिला के साथ विवाह के बंधन में बंधते नजर आ रहे हैं और इसी पोस्ट पर एक हिंदी दैनिक ने शनिवार को समाचार छाप दिया कि नई शादी के साथ-साथ दो अन्य महिलाओं ने भी अपने आपको जोशी की पत्नी होने का दावा किया है। जोशी, जिनकी पत्नी का कोरोना काल में देहांत हो गया, ने कहा कि यह मामला 2006 से है और चूँकि मामला न्यायालय में है, अतः वे उसपर कुछ कमेंट करना नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि अपने आदर्श अटल बिहारी वाजपेयी जी को कोट करते हुए यह कहेंगे कि “हमसे गलतियाँ हो सकती हैं पर हमने बेईमानी नहीं की है। और अगर गलतियाँ की हैं तो प्रायश्चित भी होगा।” दीपक जोशी की गिनती उन राजनेताओं में होती है जो अपनी साफगोई और क्लीन ट्रैक रिकॉर्ड के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके साथ उनके पिता स्वर्गीय कैलाश जोशी की समृद्ध राजनीतिक विरासत भी है।
    अधिकारी का कुर्सी प्रेम
    भोपाल स्थित शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यालय में कर्मचारी यह देखकर खुश हुए कि एक अधिकारी महोदय अपने रिटायरमेंट और फेयरवेल के बाद फिर से ऑफिस आ गए। कर्मचारियों ने सोचा कि साहब अपने सहयोगियों से मिलने आए हैं। पर कर्मचारी तब भौंचक्के हो गए जब पता चला कि वे ऑफिस में लगातार बैठेंगे क्योंकि ऑफिस की बड़ी मैडम इस बात की कोशिश कर रही हैं कि अधिकारी महोदय को उनकी सेवानिवृत्ति के पश्चात संविदा पर एक साल के लिए उनके पुराने पोस्ट पर ही रख लिया जाए। मैडम आश्वस्त हैं कि वे अपने पुराने सहयोगी को पुनर्नियुक्ति दिला देंगी, जबकि अधिकारी महोदय के रोज-रोज आने और अपने ऑफिस में बैठने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त होता जा रहा है। जानकारी के लिए सेवानिवृत्त अधिकारी महोदय के पास खरीद-फरोख्त से जुड़े महत्वपूर्ण चार्ज थे, जिसका दायित्व अभी भी वे बखूबी पूरा कर रहे हैं। कागजों पर सिर्फ उनका दस्तखत नहीं होता है।
    व्यापारी और ट्रैफिक पुलिस
    भोपाल में न्यू मार्केट में कुछ जगहें ऐसी हैं जहाँ प्रीमियम पार्किंग या अन्य घोषित पार्किंग नहीं होने से कोई भी अपनी गाड़ी दुकानों के सामने खड़ी कर देता है। इन जगहों में से एक जगह के व्यापारियों ने एक ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी से रिश्ता बना लिया है। जहाँ कोई गाड़ी खड़ी हुई नहीं कि उन अधिकारी के पास फोन पहुँचता है और ट्रैफिक पुलिस जवान मेन रोड पर व्यवस्था छोड़कर धड़धड़ाकर वहाँ पहुँचते हैं और गाड़ी को उठाकर ले जाते हैं। इस बात का पता तब चला जब एक पत्रकार महोदय की गाड़ी ट्रैफिक पुलिस के लोग उठा ले गए। गाड़ी छुड़वाने में असफल पत्रकार महोदय को अंततः एक व्यापारी की मदद लेनी पड़ी। फिर से फोन चैनल स्थापित हुआ। पत्रकार महोदय एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस के पास गए और इस बार गाड़ी वापस मिल गई। एक ट्रैफिक अधिकारी ने कहा कि हम भी देखना चाहते थे कि गाड़ी किसकी है। खैर, ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी और इस खास जगह के व्यापारियों का मधुर रिश्ता अब चर्चा का विषय है।
    -रंजन श्रीवास्तव
    Bhopal Bureaucracy chief minister Dr Mohan Yadav Deepak Joshi Gwalior Indore Jabalpur Jagdish Devda Kailash Vijayvargiya Madhya Pradesh Malwa Mandala Mandsaur politics Prahlad Singh Patel Rewa Sagar Shahdol Ujjain Vallabh Bhavan
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Telegram WhatsApp Email
    Previous Articleअभ्युदय मध्य प्रदेश क्विज़: डॉ मोहन यादव के क्विज में चौहान का नाम क्यों और उमा भारती क्यों नहीं?
    Next Article When Surya Turns Back and the Christ Is Born
    Avatar photo
    suntoday
    • Website

    Related Posts

    विधान सभा में “घंटे” की गूंज

    February 16, 2026

    बुंदेलखंड सर्वदलीय मोर्चा का दिल्ली में धरना 13 फरवरी को

    February 12, 2026

    आजकल बच्चों का बचपन मोबाइल और टीवी छीन रहा है: मनीषा आनंद

    February 12, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 SUN Today. All Rights Reserved.
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • Advertise With Us
    • Privacy Policy

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.