भोपाल: बुंदेलखंड सर्वदलीय मोर्चा 13 फरवरी को दस सूत्रीय मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर – मंतर पर धरना देगा.
बुंदेलखंड सर्वदलीय मोर्चा के संरक्षक व सोशलिस्ट नेता रघु ठाकुर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मोर्चा लम्बे समय से सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ हरिसिंह गौर व भारतीय हॉकी के गौरव मेजर ध्यानचंद को भारतरत्न देने की मांग कर रहा है. इन मांगों के साथ अंचल के विकास से जुड़े कुछ और मुद्दे भी उठाए जाते रहे हैं जो कई सालों से लंबित है.
रघु ठाकुर ने बताया कि इन मांगों में बुंदेलखंड की छह स्वीकृत रेल लाइनों का काम शुरू करने, राज्यरानी एक्सप्रेस का स्टापेज जरुआखेड़ा में करने, बुंदेलखंड पर्यटन बोर्ड बनाकर पर्यटक – पथ का निर्माण करने, उत्तरप्रदेश – मध्यप्रदेश के बीच अंतरराज्यीय पर्यटन बस व टैक्सी सेवा शुरू करने, लालगढ़ – पुरी एक्सप्रेस का स्टापेज बीना मालखेड़ी में करने, सागर के सुभाषनगर रेलवे ओवरब्रिज को जनोपयोगी बनाने, भिण्ड से दिल्ली व भोपाल राजधानी को जोड़ने रेल सेवा शुरू करने, कटनी और भिण्ड सहित अन्य जगहों पर पीपीपी मॉडल के बजाय सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने एवं मुरैना में अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल विश्वविद्यालय की स्थापना करने की मांग शामिल है.
जिन स्वीकृत रेललाइनों पर काम शुरू करने की मांग की जा रही है उनमें ललितपुर – सागर- छिंदवाड़ा, छतरपुर – सागर, भिण्ड – बांदा – महोबा, ललितपुर – चंदेरी – गुना, झांसी – शिवपुरी – श्योपुर, दमोह – पन्ना रूट शामिल है.
जंतर-मंतर पर 13 फरवरी के धरने को सुप्रसिद्ध समाजवादी चिंतक एवं जननेता रघु ठाकुर सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता व राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, कांग्रेस नेता रामकुमार पचौरी (सागर), लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शम्भूदयाल बघेल (ग्वालियर), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्यामसुंदर यादव ( भिण्ड), कांग्रेस के पूर्व विधायक सुनील जैन (सागर) , लोसपा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष विन्ध्येश्वरी पटेल, बुंदेलखंड सर्वदलीय मोर्चा उत्तरप्रदेश इकाई के प्रमुख भूपेन्द्र जैन, हरपाल सिंह (ललितपुर), श्रीमति अनीता सिंह, डॉ शिवा श्रीवास्तव, जयंत तोमर, आदीश जैन और अन्य वक्ता संबोधित करेंगे.
बुंदेलखंड सर्वदलीय मोर्चा के नेताओं ने क्षेत्र के विकास के मुद्दों को लेकर अधिक से अधिक लोगों को दिल्ली पहुंच कर धरने को समर्थन देने की अपील की है.
रघु ठाकुर ने कहा कि उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड के विकास में सरकारों की लम्बे समय से उदासीनता के कारण इस अंचल के लोगों में काफ़ी क्षोभ और असंतोष है. सरकार की इसी तरह की उपेक्षा से पिछड़े क्षेत्रों में अलग राज्य की मांग उठती है.

